ये खत मिलेगा तो शायद हम ना रहें मगर उम्मीद करता हूं कि आपका डर आपकी जान ना ले।
आज चैन कि नींद मिली।ऐसा लगा मानो कई सालों से सोया नहीं था।रोज़ तो ५/६ बजे तक उठ जाता था मगर आज १० बज रहे हैं पर उठने का जरा भी मन्न नहीं कर रहा ।
फिर भी उठना तो पड़ेगा ही ,फिर कॉलेज भी जाना है।अरे यार १० बज गए मेसेज नहीं किया अभी तक उसने।क्या बात है लगता है भूल गई।
ये सब सोचता आज विक्टर कई दिनों बाद चैन कि नींद सोया था।और अपनी क्यूट सी फ्रेंड प्रिया के बारे में सोचता खुद ही से बातें कर रहा है।
अरे सॉरी यार वो आज पता नहीं कैसे कुछ ज़ादा ही सो गया और आंख ही नहीं खुली।
(विक्टर प्रिया को मनाते हुए कहता है)
चल यार कुछ खाते हैं बड़ी भूख लगी है विक्टर प्रिया को मनाने के लिए कहता है।
तू ना हमेशा ऐसा ही करता है पहले गलती करेगा फिर माफी मांगेगा एक दिन जब मर जाऊंगी ना तब मनाते रहियो।
प्रिया रूठी हुई कहती है।
ए खबरदार ऐसा दोबारा बोला तो मौत भी तुझसे मिलने से पहले मुझसे परमिशन लेगी।
और दोनों हस्ते हुए चाय के स्टॉल पर जाते हैं।
दोनों चाय की चुस्की लेते हुए प्रिया कहती है
यार एक बात बता तू अंधेरे से इतना डरता क्यों है।
कोई खा थोड़ी जाएगा तुझे।
अरे नहीं यार बस पता नहीं लगता है।
तुझे पता है दरर क्या होता है। ह्मम क्या(विक्टर हां में गर्दन हिलाते हुए) डर एक एहसास है जो हमें अक्सर अंधेरे में जीने की शक्ति देता है अगर अंधेरे में गए और डर ना हो तो मर भी गए तो भी गम नहीं होगा मगर डर होगा तो इस बात का की अगर मर गया या कुछ होगया मुझे तो मेरे पीछे रोने वाले हैं और जिसके आगे पीछे कोई रोने वाला नहीं कोई उसकी चिंता करने वाला नहीं तो उसे क्या डर मारने का ।
हम्म मतलब डर अच्छा है ।और दोनों हस्ते हुए कॉलेज जाते हैं।
एक दिन ऐसेहि मै फिर से देर से उठा मगर वो सुबह कुछ जादा हो बदकिस्मत थी मन्हूस थी।
सुबह उठा तो मेसेज देखा । अननोन नो से था कि
प्रिया का एक्सिडेंट हो गया है जल्दी से सिटी हॉस्पिटल आजाओ।
मैंने ना आओ देखा ना ताव ना मुंह धोया ना नहाया कुछ नहीं बस दौड़ते हुए हॉस्पिटल पहुंचा।
देखा तो प्रिया का नहीं बल्कि प्रिया की कजिन बहन का एक्सिडेंट हुआ था।
यार तुमने तो मुझे दरा ही दिया था(मैं हाफ्ते हुए बोला)
अरे पर हुआ क्या (प्रिया ने धीरे से पूछा)
नहीं कुछ नहीं पता नहीं क्या हुआ बस वो मेसेज देखा तो अजीब सा डर लगा और मुझे कुछ समझ नहीं आया मै बस तुम्हे देखने चला आया । ह्म्म प्रिया ने जवाब दिया । और मुझे दिलासा देते हुए घर जाने को कहा ।
मै घर तो आया मगर पूरे रास्ते भर यही सोचते आरहा था कि हुआ क्या था मुझे मै ।पता नहीं क्या होगया।
मै खुद ही से बातें करता चला आया।
कई दिन बीते ऐसेही और मुझे लगने लगा कि मै प्रिया को पसंद करने लगा हूं।और उससे दूर नहीं रह सकता।पता नहीं क्यों मगर उससे दूर जाते ही उसका खयाल मेरे ज़हन में घूमता रहता।
एक दिन मैंने हिम्मत जुटा के प्रिया से केह दिया यार प्रिया
मुझे कुछ कहना था हां बोलोना (प्रिया ने जवाब दिया)
हम चाय पी ही रहे थे कि पीछे से शायद किसी ने आवाज़ दी प्रिया को और वो जैसे ही आगे बढ़ती की
किसी गाड़ी ने ठोकर मार दी।
मैंने चाय छोड़ा उसे उठाकर हॉस्पिटल ले गया।
प्रिया की सांसें चल रही थी मगर कुछ बोल नहीं पा रही थी।
मैंने उसे सब बता दिया कि मै उसे खोने से डरता हूं
और उसे प्यार करता हूं और उसे कभी अकेला नहीं छोडूंगा
कभी उससे दूर नहीं जाऊंगा हमेशा उसके पास रहूंगा।
तभी डॉक्टर अगाए और मुझे बाहर जाने को कहा मगर प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ मुझे रुकने का इशारा किया।
मैंने उसका हाथ पकड़ उसे दिलासा दिया कि मै यही हूं उसके पास।
डॉक्टर ने इलाज शुरू किया मगर उसके ठीक होने के चांसेस कम थे उन्होंने ने कहा अब इसे दावा नहीं सिर्फ दुआ ठीक कर सकती है।
मैंने प्रिया का हाथ पकड़ा और शायद उस समय में डर रहा था कि मै उसे खो ना दूं मैंने हिम्मत जुटाई और आंसू पूछते हुए उसे दिलासा दिलाया की मै उसके पास हूं और कहीं नहीं जा रहा उसे छोड़ कर ।
मैं प्रिया को सुला कर बाहर आया तो उसके घर वाले आ चुके थे
मैंने डॉक्टर से पूछा की उन्होंने ने ऐसा क्यों कहा कि उसे सिर्फ दुआ ही काम आसक्ति है।
क्युकी एक्सिडेंट में उसके सर पर चोट लगने से उसके दिमाग पर गहरा ज़ख्म हुआ है जिसे हमने ऑपरेशन कर खून तो रोक दिया है मगर उसके पास जादा समय नहीं ।
इस समय उसके परिवार जन को भी कहे उसे खुश रखने के लिए और कोई दुखी ना हो इससे उसे दुख होगा जिससे उसे प्रॉबलम हो सकती है।(डॉक्टर ने जवाब दिया और मुझे दिलासा दिया)
मगर मेरे आंसू रुक ही नहीं रहे थे।मैंने बहोत हिम्मत जुटा कर प्रिया से कुछ देर बातें की मगर मै अपने आंसू जादा देर तक रोक ना पाया।
मै जानती हूं मेरे पास ज़दा समय नहीं है।(प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा)
मैंने उसकी बात वहीं काट कर उसके माथे को चूम लिया और उसका हाथ पकड़ उसी के पास बैठ गया।
हम रात भर बात करते रहे मगर
सुबह हुई तो डॉक्टरों को हॉस्पिटल से दो लाशें ले जानी पड़ी।
एक प्रिया की और एक मेरी।
उसने कहा था कहीं मै मर गई तो कैसे जिओगे मै उसे खो देने के डर से उस वक़्त उसे कुछ नहीं कहता मगर अब तो कोई गम नहीं ।
जो सांसे लिखी थी नसीब में
वो ले रहे थे हम
उधर थी ज़िन्दगी
जी रहे थे हम
जब सांस छिनी तो छोड़ दिए
हम भी साथ उसका
अब क्या करते इस जीवन का जो उधार था उसका
चुका रहे हैं मोल हम प्यार का इस जीवन में
चुका देंगे परिवार का मोल अगले जीवन में।।
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