Thursday, June 18, 2020

एक मुलाकात

एक मुलाकात..

सूरज..! हम कहां जा रहे हैं(मैंने पूछा ) इन सब से दूर बहुत दूर जहा हमे परेशान करने वाला कोई नहीं होगा ।कहकर सूरज गाड़ी की रफ्तार और बढ़ता है।

मै स्मिता,ये मेरी कहानी है ,सूरज और मै एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।मगर हमारे इस प्यार को हमारे घर वाले नहीं मानते ।उनका कहना था कि प्रेम विवाह जदा दिन तक नहीं चलते ।ये बस चार दिन की चांदनी होती है।
मगर हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।हमने सोचा सबसे दूर जाकर हम शादी करलेंगे और वहीं कहीं अपना छोटा सा आशियां बनाएंगे।जहां सिर्फ मै सूरज और हमारे सपने हो।
मगर शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।
हम बातें कर रहे थे कि सूरज का ध्यान हटा और हमारा एक्सिडेंट हो गया।गाड़ी एक खंभे से जा टकरा गई।और हम दोनों ही गाड़ी से नीचे गिर गए।मगर कहा पता नहीं।

काफी देर तक मै बेहोश पड़ी रही फिर जाके मुझे जब होश आया तो मैंने खुद को एक घर में पाया।
एक बूढ़े बुज़ुर्ग मेरे बिस्तर के पास ही बैठे सो रहे थे।
मै उठने की कोशिश करने लगी तब तक उनकी आंख खुल गई उन्होंने मुझे समझाते हुए मुझे लेटे रहने को कहा
क्युकी एक्सिडेंट में मैंने अपने पैर खो दिए।

मैंने चद्दर हटा कर देखा तो मेरे पैर नहीं थे।मै बहुत रोई।
अपने पैर खो दिए थे ।मेरे आंसू तो रुक ही नहीं रहे थे
मैंने उन बाबा से पूछा कि क्या उन्होंने मेरे सूरज को देखा तो उन्होंने इंकार कर बोला कि
बाबा: बेटा मै तो रास्ते से अरहा थी तभी मैंने तुम्हे दर्द से कर्राह ते हुए देखा तो तुम्हे किसी कि सहायता से अपनी कुटी तक ले आया ।मै एक बैद हूं।
मैंने तुम्हारे ज़ख्मों पर मलहम लगा उनकी पट्टी कर दी है कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएंगे।मगर बेटा मुझे माफ़ करना
मै तुम्हारे पैर नहीं ठीक कर सका ।मुझे माफ़ करदेना ।

मैंने उन्हें आग्रह कर उन्हें एक्सिडेंट वाली जगह पर जाने को कहा और सूरज को ढूंढने के लिए कहा।मगर वो नहीं मिला।

मै दिन रात उसको ही सोचती
कहा होगा वो
बाबा:बेटी ..! क्या सोच रही हो?
हम शादी करने वाले थे।घर वालो को हमारी जोड़ी नहीं पसंद इसलिए हमने भाग कर शादी करने का फैसला किया
हम सब से कहीं दूर जाकर बसने वाले थे।
मगर सब बिखर गया।सब बर्बाद हो गया।
अब तो उससे मुलाकात भी होगी या नहीं पता नहीं।


Sunday, June 7, 2020

वन्दे मातरम्

वंदे मातरम्


आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं 
झांकी हिंदुस्तान की 
इस मिट्टी की तिलक करो 
ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्... 
वंदे मातरम्

याद करो इस बगिया को 
यहां तुमनें भी कभी खेला था
याद करो इस पेड़ को 
जिसका फल तुमने खाया था
वंदे मातरम्!! वंदे मातरम्

याद करो उन नदियों को 
जहाँ तुमने पानी पिता था
याद करो उन गलियो को 
जहा भूल भटके आए थे
वंदे मातरम्.....वंदे मातरम!!!

याद करो उस रास्ते को 
जहां पे तुम भी चलते थे
याद करो उस मंज़र को 
जो तुमने कभी को सोचा था 
अपने भारत देश के लिए 
इतना तो कर सकते हो
झुक कर आओ सजदा करे 
हम भारत मां के बच्चों को
वंदे मातरम्........वन्दे मातरम्!!!!!

याद करो बलिदानो को 
जो दिए गए इस भूमि पर
याद करो उन वीरों को 
जो आज हैं इन तस्वीरों पर 
कभी उन्होंने कसम खाई थी 
कभी उन्होंने भी प्रन लिया था
भारत को मुक्त कराएंगे
तुमसे तकदीर लिखवाएंगे 
उनकी किस्मत चमकाएंगे
उनको भी मुक्त कराएंगे
उनसे भी प्यार निभाएंगे 
उनमे भी प्यार जगायेंगे
आओ मिलकर सजदा करें
हम भारत मां के वीरों को
जो लटक गए यूं सुली पर 
जैसे झुल गए हो झूले पर
वंदे मातरम्...वंदे मातरम्!!!

आओ हम ये प्रतिज्ञा लें
इस मिट्टी से हम तिलक करें
ये देश था वीर जवानों का 
था ऋणी मेहनती किसानों का
एक सुली चढ़ कर डोल गया
एक खेत में चल कर बोल गया
ये माटी प्यारी मेरी है
ये भारत मां भी मेरी है
हम प्राण प्रतिज्ञा करते हैं
भारत को मुक्त कराएंगे
हर पुस्तक मै हर ग्रंथ में
हम सब से ये लिखवाएंगेये 
भारत भूमि मेरी है
ये मां भी मेरी तेरी है
तू कसम खा के आज घर से चल
तू इसका तिलक लगा के चल
तू मुक्त कराएगा इसको
हम सब का ऋण चुकाएगा
बस करता हूं मै आज नमन
अपनी भारत भूमि को

अये माता मै तो आज चला
छोड़ जा रहा हूं तेरे गर्व मै तेरे शेरों को
वंदे मातरम् 
वंदे मातरम्
वंदे मातरम्
वंदे मातरम्...।

एक मुलाकात

एक मुलाकात.. सूरज..! हम कहां जा रहे हैं(मैंने पूछा ) इन सब से दूर बहुत दूर जहा हमे परेशान करने वाला कोई नहीं होगा ।कहकर सूरज गाड़ी की रफ्ता...