एक मुलाकात..
सूरज..! हम कहां जा रहे हैं(मैंने पूछा ) इन सब से दूर बहुत दूर जहा हमे परेशान करने वाला कोई नहीं होगा ।कहकर सूरज गाड़ी की रफ्तार और बढ़ता है।
मै स्मिता,ये मेरी कहानी है ,सूरज और मै एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं।मगर हमारे इस प्यार को हमारे घर वाले नहीं मानते ।उनका कहना था कि प्रेम विवाह जदा दिन तक नहीं चलते ।ये बस चार दिन की चांदनी होती है।
मगर हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे।हमने सोचा सबसे दूर जाकर हम शादी करलेंगे और वहीं कहीं अपना छोटा सा आशियां बनाएंगे।जहां सिर्फ मै सूरज और हमारे सपने हो।
मगर शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।
हम बातें कर रहे थे कि सूरज का ध्यान हटा और हमारा एक्सिडेंट हो गया।गाड़ी एक खंभे से जा टकरा गई।और हम दोनों ही गाड़ी से नीचे गिर गए।मगर कहा पता नहीं।
काफी देर तक मै बेहोश पड़ी रही फिर जाके मुझे जब होश आया तो मैंने खुद को एक घर में पाया।
एक बूढ़े बुज़ुर्ग मेरे बिस्तर के पास ही बैठे सो रहे थे।
मै उठने की कोशिश करने लगी तब तक उनकी आंख खुल गई उन्होंने मुझे समझाते हुए मुझे लेटे रहने को कहा
क्युकी एक्सिडेंट में मैंने अपने पैर खो दिए।
मैंने चद्दर हटा कर देखा तो मेरे पैर नहीं थे।मै बहुत रोई।
अपने पैर खो दिए थे ।मेरे आंसू तो रुक ही नहीं रहे थे
मैंने उन बाबा से पूछा कि क्या उन्होंने मेरे सूरज को देखा तो उन्होंने इंकार कर बोला कि
बाबा: बेटा मै तो रास्ते से अरहा थी तभी मैंने तुम्हे दर्द से कर्राह ते हुए देखा तो तुम्हे किसी कि सहायता से अपनी कुटी तक ले आया ।मै एक बैद हूं।
मैंने तुम्हारे ज़ख्मों पर मलहम लगा उनकी पट्टी कर दी है कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएंगे।मगर बेटा मुझे माफ़ करना
मै तुम्हारे पैर नहीं ठीक कर सका ।मुझे माफ़ करदेना ।
मैंने उन्हें आग्रह कर उन्हें एक्सिडेंट वाली जगह पर जाने को कहा और सूरज को ढूंढने के लिए कहा।मगर वो नहीं मिला।
मै दिन रात उसको ही सोचती
कहा होगा वो
बाबा:बेटी ..! क्या सोच रही हो?
हम शादी करने वाले थे।घर वालो को हमारी जोड़ी नहीं पसंद इसलिए हमने भाग कर शादी करने का फैसला किया
हम सब से कहीं दूर जाकर बसने वाले थे।
मगर सब बिखर गया।सब बर्बाद हो गया।
अब तो उससे मुलाकात भी होगी या नहीं पता नहीं।